श्रीगंगानगर. फायरिंग, घुसपैठ, नशीले पदार्थों की तस्करी, बार्डर पर आमतौर पर यही होता है, लेकिन राजस्थान का श्रीगंगानगर बार्डर अपने आप में अनूठा है। यहां शांति की फसल होती है। भारत-पाक सीमा पर बसे इन गांवों में किसान तारबंदी के इस ओर तथा उस ओर दोनों तरफ खेती करते हैं और वो भी बकायदा बीएसएफ जवानों की कड़ी सुरक्षा में।
सीमा पर माहौल कितना भी खराब हो, बीएसएफ कभी भी यहां खेती से मना नहीं करती। बल्कि, किसानों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़ी रहती है। रबी सीजन में इन खेतों में अमूमन बैसाखी के आसपास फसलों की कटाई शुरू हो जाती है।
श्रीगंगानगर में ही खेती क्यों : राजस्थान के चार जिले भारत-पाक सीमा से सटे हैं, जिनमें श्रीगंगानगर, बीकानेर, बाड़मेर व जैसलमेर शामिल हैं। इनमें श्रीगंगानगर जिला ऐसा है, जहां सारे खेतों में सिंचाई नहरों व खालों से होती हैं। बाकी जिलों में बार्डर के आसपास सिंचाई होती है, लेकिन वह बारिश पर टिकी है। यानी बारिश होने पर किसान वहां बुवाई करते हैं। चूंकि श्रीगंगानगर में पानी की मात्रा अच्छी है। सो यही जिला ऐसा है, जहां नियमित रूप से खेती होती है।
20 गांवों के 5000 से ज्यादा किसान करते हैं अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास खेती
> किसानों को बीएसएफ आई कार्ड जारी करती है।
> खेतों में आते और जाते दोनों समय चेकिंग होती है।
> किसान केवल दिन में ही खेती कर सकते हैं।
> बीएसएफ जवान खेतों में तैनात रहते हैं।
> किसानों को बीएसएफ आई कार्ड जारी करती है।
> खेतों में आते और जाते दोनों समय चेकिंग होती है।
> किसान केवल दिन में ही खेती कर सकते हैं।
> बीएसएफ जवान खेतों में तैनात रहते हैं।
No comments:
Post a Comment