खेल डेस्क. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर का क्रिकेट करियर रिकॉर्ड्स से भरा पड़ा है, फिर भी एक चीज है जिसका सचिन को आज भी मलाल है। यह है लंबे समय तक भारतीय टीम की कप्तानी न कर पाना। हाल ही में एक कार्यक्रम में सचिन तेंडुलकर ने इसका जिक्र किया। उन्होंने कहा, “कम समय के लिए कप्तानी मिलने का उन्हें आज भी मलाल है। इससे वो अभी तक उबर नहीं पाए हैं।” बता दें कि सचिन तेंडुलकर को दो बार भारत की कप्तानी करने का मौका मिला था, लेकिन दोनों ही बार उनका रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा।

सबसे पहले 1996 में सचिन को भारत की कप्तानी करने का मौका मिला था, लेकिन वो सफल नहीं रहे। इस बारे में सचिन कहते हैं, “मेरे लिए क्रिकेट एक टीम वर्क है। टीम में एक कैप्टन को गइड करना होता है, अहम निर्णय लेने होते है, लेकिन फील्ड पर जाकर रन बल्लेबाजों को ही बनाने पड़ते हैं, बॉलर्स को विकेट लेने ही पड़ेंगे और सही गेंदबाजी करनी होगी। पहली बार में मुझे 12-13 महीने में ही कप्तानी से हटा दिया गया था। ये मेरे लिए निराशा की बात थी। आप कप्तान नियुक्त करते हैं और सोचते हैं कि ये टीम को आगे ले जाएगा, लेकिन यदि वक्त ही ना मिले तो रिजल्ट जीरो हो जाता है। यदि आपने बतौर कप्तान 4 मैच खेले और दो जीते तो सफलता का प्रतिशत आधा ही रहेगा।”
इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया टूर से की तुलना
सचिन ने अपनी कप्तानी के दौरान और साल 2011 के भारतीय टीम के इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के टूर की तुलना की। उन्होंने कहा कि 2011 में इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया के दौरों पर भारतीय टीम की हार का कारण बोर्ड पर रन नहीं होना था। हमारे पास रन थे नहीं और हम विकेट भी नहीं ले पाए। ऐसा ही कुछ मेरी कप्तानी के दौरान भी हुआ था। तब हम चार टेस्ट मैच इंग्लैंड में और चार टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया में हारे थे। उन्होंने कहा, “मेरी कप्तानी के दौरान कई चुनौतियां थी। हम वेस्ट इंडीज दौरे पर गए, जो तब हमसे बेहतर टीम थी। इसके बाद हम साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए। वहां भी कई चुनौतियां थी।”
* सचिन को दो बार भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया। पहली बार 1996 में, लेकिन वो सफल नहीं रहे। तब मो. अजहरुद्दीन ने ये तक कह दिया था कि “नहीं जीतेगा... छोटे के नसीब में जीत नहीं है।” 1997 में सचिन से कप्तानी वापिस ले ली गई थी।
* 1999 में एक बार फिर सचिन कैप्टन बने। 1999 में वर्ल्ड चैम्पियन बनी ऑस्ट्रेलिया से उनके घर में ही सचिन की टीम को टेस्ट सीरीज खेलनी थी। इसमें भारत की 0-3 से हार हुई। हालांकि, सचिन को मैन ऑफ द सीरीज और एक मैच में मैन ऑफ द मैच का अवॉर्ड मिला था। इसके बाद घरेलू मैदान पर टीम इंडिया 0-2 से साउथ अफ्रीका से भी हारी। इसके बाद सचिन ने खुद ही इस्तीफा दे दिया था। तब 2000 में सौरव गांगुली नए कप्तान नियुक्त किए गए थे।
मैच जीते हारे ड्रॉ टाई नो-रिजल्ट जीत का %
टेस्ट 25 4 9 12 0 – 16%
वनडे 73 23 43 – 2 6 31.50%
सचिन मानते हैं कि लगातार दूसरे साल भी टीम इंडिया वर्ल्ड कप जीत सकती है। उन्होंने कहा, “जिस तरह से भारतीय टीम खेल रही है, उससे वो इस बार भी वर्ल्ड कप जीत सकती है। मैं टीम से बहुत प्रभावित हूं। हम अच्छी बैटिंग और अच्छी बॉलिंग के साथ ही शानदार फील्डिंग भी कर रहे हैं। एक भी ऐसा क्षेत्र नहीं हैं जहां हम लगातार अच्छा प्रदर्शन ना कर रहे हों।”
सचिन ने कहा कि हमने पाकिस्तान और साउथ अफ्रीका के खिलाफ बेहतरीन खेल दिखाया। इसका पूरा क्रेडिट टीम को जाता है। ऐसा नहीं है कि साउथ अफ्रीका ने खराब खेला, बल्कि हमने उन्हें अच्छा खेलने ही नहीं दिया। मुझे लगता है कि जब मोहित शर्मा ने एबी डिविलियर्स को रन आउट किया, तभी हम मैच में वापसी कर चुके थे। ये मैच का टर्निंग प्वाइंट था।
वनडे के बदले नियमों से सचिन खुश नहीं है। उनके अनुसार ये नियम बल्लेबाजों के फेवर में हैं। गौरतलब है कि अब इनिंग के दौरान पांच फील्डर्स सर्किल के अंदर ही रहेंगे। सचिन ने कहा, “क्रिकेट बदल रहा है, लेकिन हाल ही में किया गया बदलाव बॉलर्स के लिए काफी कठोर हैं। 5 फील्डर्स के अंदर रहने से पहले जो टीम 260 या 270 बनाती थी अब वही टीमें 310 से ज्यादा का स्कोर बना रही हैं। 290 और 300+ का स्कोर पर चेज किया जा रहा है। कई साल पहले ये मुमकिन नहीं था। इसलिए मैं तो इस नियम से संतुष्ट नहीं हूं। क्योंकि एक तरफ हम अच्छी क्रिकेट के लिए बॉलर्स को आगे लाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ ऐसे नियमों से उनपर ही दबाव डाल रहे हैं। यदि आप क्वालिटी बॉलर नहीं हैं तो ऐसे नियमों के साथ लंबा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे।”
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