Friday, January 30, 2015

ALERT: इसका रखें ध्यान, तो मिल सकता है आपका चोरी/खोया MOBILE

भोपाल। क्राइम ब्रांच की लॉस्ट सेल फोन यूनिट ने जुलाई 2013 से दिसंबर 2014 तक चोरी हुए 7000 में से 1800 मोबाइलढूंढ निकाले हैं। इतना ही नहीं मिले हुए सारे मोबाइल उनके सही मालिकों तक भी पहुंचा दिए गए हैं। हालांकि, पता और आईएमईआई नंबर गलत देने के बावजूद पुलिस ने मोबाइल ढूंढ निकालने में सफलता हासिल की है। पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अक्सर फरियादी गलत जानकारी देते हैं। ऐसे में मोबाइल ट्रेस करने में हमारी टीम को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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माेबाइल चोरी होने की शिकायत करते फरियादी।
सही जानकारी देने पर कई मोबाइल तो तीन दिन में ट्रेस हो गए, तो कई 6 महीने में भी ट्रेस नहीं हो पाए। जानना चाहते हैं मोबाइल ट्रेस न होने की वजह और कैसे मिलेगा खाेए मोबाइल? तो पढ़ें दैनिक भास्कर डॉट काम की ये खास रिपोर्ट...।
भाई के दोस्त अहमदनगर, महाराष्ट्र में चुराया और इंदौर में उपयोग किया
केस 1- विशाखा बेंटिक्ट, स्टूडेंट।
मोबाइल- नोकिया ल्यूमिया 520।
कीमत - 10 हजार रुपए।
इस तरह से मिला मोबाइल 
विशाखा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि, उसका मोबाइल गिन्नौरी तलैया से खो गया है। इस पर पुलिस ने सिम प्रदाता कंपनियों से सूचना मांगी। पुलिस को ये सूचना 3 महीने तक नहीं मिली। दिसंबर में सेल को सूचना मिली कि, इंदौर में मोबाइल और सिम का उपयोग किया जा रहा है। उपयोग करने वाला बिहार का है। जब, नंबर को सर्चिंग पर डाला तो सामने आया कि पुणे, अहमद नगर और बिहार में इस नंबर से बात हो रही है। इस सिम का ट्रू कॉलर में भी कोई रिकार्ड नहीं था। कंपनी से जानकारी मंगवाई तो उसमें इरफान राइम का नाम लिखा था और पता बिहार का था। पुलिस ने जानकारी दोबारा सर्च की उसमें इंदौर के लोकल परिचित का नाम और एड्रेस सामने आया। इस एड्रेस पर सर्च किया तो पता चला कि, विशाखा के भाई के दोस्त ने ही पुणे ���े अहमद नगर से मोबाइल चुराया था। कुछ दिनों बाद भाई का दोस्त इंदौर आ गया और यहां पढ़ाने लगा। जब उसने मप्र की सिम उपयोग की, तो सेल को उसकी पुरी जानकारी मिल गई। सेल ने उस पर दबाव डाला और उसने मोबाइल कूरियर से यूनिट में भेज दिया। सेल को मोबाइल मिलने पर उन्होंने 1 जनवरी को विशाखा को मोबाइल वापस किया।
गलत जानकारी दिए जाने के कारण इस केस में पुलिस लगभग 5 महीने तक उलझी रही। मोबाइल गुमने की शिकायत 28 अगस्त 2014 को की गई थी। मोबाइल 1 जनवरी 2015 को वापस किया गया।
स्टूडेंट ने चुराया टीचर का मोबाइल
सचिन साेनकुसरे, एसडीओ बीएसएनएल।
मोबाइल- सैमसंग चैम्प।
कीमत - 3770 रुपए।
सचिन ने 20 जनवरी 2015 को यूनिट में शिकायत की थी कि, उनकी पत्नी का मोबाइल रेड रोज स्कूल से चोरी हो गया है। उनकी पत्नी रेड रोज स्कूल में टीचर है। मोबाइल में ट्रेकर लगा था। कंपनी से जानकारी मिलने से पहले ही सेल ने ट्रेकर और सही जानकारी के अनुसार मोबाइल ढूंढ निकाला। पुलिस ने अनुसार मोबाइल में दूसरी सिम डालकर उसे चलाया जा रहा था। जांच में पता चला कि मोबाइल एक 12वीं क्लास के लड़के के पास था, जो उसी स्कूल में पढ़ता है। लड़के ने मोबाइल में नई सिम लगाकर अपनी बहन से बात की थी, जिससे वह पकड़ा गया। इस मोबाइल को 28 जनवरी को सचिन को वापस कर दिया गया।
ट्रेन में खोया मोबाइल और बताया आफिस का पता
केस-3बैरागढ़ में रहने वाले एक डॉक्टर ने शिकायत की थी कि, उसके डेस्क बोर्ड से किसी ने मोबाइल चुरा लिया है। डॉक्टर के पास सेमसंग नोट 1 था, जो कि 31500 रुपए का था। जब इस मोबाइल के आईएमईआई नंबर को सर्च किया गया, तो सामने आया कि किसी ने इस मोबाइल में सिम डालकर सिर्फ नेट का उपयोग किया था। इस दौरान जो मेले किए गए थे उसके आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंच गई। मोबाइल दुर्ग छत्तीसगढ़ में उपयोग किया जा रहा था, जिसे पुलिस ने भोपाल में मंगवाया। जांच में पता चला कि डॉक्टर ने झूठ बोला था कि, उसका मोबाइल डेस्क बोर्ड से नहीं, बल्कि ट्रेन में यात्रा के दौरान छूट गया था। एक महीने में मोबाइल का पता लगाकर डॉक्टर को वापस कर दिया गया। 

डेढ़ साल में आए 7 हजार आवेदन 
लॉस्ट कॉल फोन यूनिट की स्थापना क्राइम ब्रांच शाखा में 29 जुलाई 2013 को हुई। यूनिट में 2013 में 2613 आवेदन आए और 2014 में 4416 आवेदन। इनमें से 1800 मोबाइलों का पता लगाकर लोगों को वापस कर दिए गए।
इस तरीके से पा सकते हैं अपना खाेया मोबाइल
मोबाइल गुम होने की शिकायत के लिए वेबसाइट http://bhopalpolice.com/lostphone.html से फार्म डाउनलोड करें। इसमें जानकारी भरने के बाद मोबाइल का बिल और एड्रेस, आईडी प्रूफ के साथ एमपी नगर थाने स्थित लॉस्ट सेल फोन यूनिट में जमा कर दीजिए। जैसे ही मोबाइल की सही जानकारी मिलती है, सेल मोबाइल को ट्रेस कर ढूंढ निकालती है और सही व्यक्ति तक पहुंचा देती है। यदि फरियादी मोबाइल चोर के खिलाफ एफआईआर लिखाना चाहता है, तो एफआईआर होती है, वरना नहीं। सेल से मिली जानकारी के अनुसार ज्यादातर केसों में फरियादी मोबाइल पाकर ही संतुष्ट हो जाता है और केस दर्ज नहीं कराना चाहता।
संबंधित कंपनी को हर सोमवार को भेजी जाती है जानकारी
मोबाइल गुम होने के आवेदन जमा किए जाते हैं, हर सोमवार को सारे मोबाइल की डिटेल मोबाइल कंपनियों को भेजी जाती है। यदि किसी कंपनी की सिम का उपयोग होता है तो वह अगले दिन ही इसकी जानकारी यूनिट को भेज देती है। ऐसे में यदि मोबाइल बंद रहा तो जानकारी जल्दी नहीं मिल पाती है। जानकारी आने के बाद सिम की लोकेशन ट्रेस की जाती है। इसके बाद मोबाइल से जो भी बात हो रही है, उसकी जानकारी ली जाती है। इसी आधार पर मोबाइल सर्च किए जाते हैं।
एक मोबाइल बिकता है कई बार
कई केसों में ये भी जानकारी सामने आई है कि मोबाइल चुराने वाला इसे किसी को बेच देता है और वह किसी दूसरे को। इस तरह एक मोबाइल कई बार बिक जाता है। ज्यादातर मोबाइल बिहार और उत्तर प्रदेश में जाते हैं। इन दो राज्यों के बाद कुछ मोबाइल जम्मू-कश्मीर में भी बेचे जाते हैं।

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