भोपाल। आज पूरी दुनिया महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित कर रही है। बापू हमेशा अनुशासन प्रिय रहे और उन्होंने भारत में राम राज्य का सपना देखा। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं जब बापू की इसी राम राज्य की व्याख्या पर काफी बवाल भी मच गया था। यह व्याख्या बापू ने 1929 में अपने भोपाल दौरे के दौरान की थी। वे भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खां के बुलावे पर आए थे और बेनजीर मैदान पर सभा में यह व्याख्या की थी। यह पूरा प्रसंग गांधी शताब्दी समिति द्वारा लिखवाई गई किताब मध्यप्रदेश में गांधी जी में लिखा हुआ है। पढ़िये, उसके कुछ अंश-
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बेनजीर मैदान पर हुई सभा में गांधी जी ने अपने भाषण की शुरुआत में नवाब हमीदुल्ला के प्रति कृतज्ञता प्रकट की थी और कहा कि नवाब साहब और भोपाल की जनता के प्रति उनके मन में जो प्रेम की भावना थी वह उन्हें यहां खींच लाई। नवाब साहब के सादे जीवन की प्रशंसा करते हुए गांधी जी ने उनकी तुलना हजरत उमर से की और कहा कि भोपाल की जनता का यह सौभाग्य है कि उन्हें इस प्रकार के शासक प्राप्त हुए हैं।
रामराज्य की व्याख्या
रामराज्य के बारे में बोलते हुए गांधी जी ने कहा था कि किसी देश के लिए नरेशों यानी राजाओं का शासन भी प्रजातंत्र के समान महानता को प्राप्त करने में समर्थ हो सकता है। यही कारण है कि मेरी देशी नरेशों से कोई दुश्मनी नहीं है और मेरा विश्वास है कि देशी नरेश भी यदि पूरी तरह प्रयत्नशील हों तो देश में रामराज्य की स्थापना हो सकती है। मुस्लिम बहुल श्रोताओं के समक्ष जब गांधीजी ने रामराज्य की बात कही तो उसके आगे इसकी व्याख्या भी उन्हें करनी पड़ी।
उन्होंने कहा, "रामराज्य का अर्थ हिंदू राज्य नहीं है। मैं मुसलमान भाईयों से कहना चाहता हूं कि वे रामराज्य का अर्थ गलत न समझें। रामराज्य से मेरा मतलब है, ईश्वर का राज। मेरे लिए राम और रहीम में कोई अंतर नहीं है। मेरे लिए तो सत्य और सत्कार्य ही ईश्वर है। पता नहीं, जिस रामराज्य की कल्पना हमें सुनने को मिलती है वह कभी इस पृथ्वी पर था थी या नहीं, लेकिन प्राचीन रामराज्य का आदर्श प्रजातंत्र के आदर्शों से बहुत कुछ मिलता-जुलताा है और कहा गया है कि रामराज्य में दरिद्र से दरिद्र व्यक्ति भी कम खर्च में और अल्प अवधि में न्याय प्राप्त कर सकता था। यहां तक कहा गया है कि रामराज्य में एक कुत्ता भी न्याय प्राप्त कर सकता था। यदि देश में शासक और शासित ईश्वर पर भरोसा रखने वाले हों तो वह शासन दुनिया की सभी प्रजातंत्रीय व्यवस्थाओं से उत्तम होगा।'
किताब में कहा गया है कि गांधी जी द्वारा नवाब साहब और रामराज्य के संबंध में जो कहा गया या लिखा गया था, उसे लेकर काफी विवाद भी हुआ। माना जाता है कि विवाद राजाओं के शासन को प्रजातंत्र से बेहतर बताने के कारण हुआ था। उन्होंने नवाब हमीदुल्ला खां की तुलना हजरत उमर से की थी। हजरत उमर मुहम्मद साहब के प्रमुख चार साथियों में से एक थे।
गांधी जी दो बार भोपाल आए थे। 1929 के बाद वे 1933 में भोपाल आए थे। तब उन्हें भोपाल से अपनी ट्रेन बदलना था तो कुछ देर के लिए यहां रुके थे। इस दौरान उन्होंने जनसभा को संबोधित भी किया था।
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