नई दिल्ली. अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी ने त्राल में सेना के कर्नल एमएन राय की हत्या करने वाले आतंकवादियों को शहीद बताया है।
बता दें कि त्राल में हुई इस मुठभेड़ में सेना के कर्नल एमएन राय और जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक हेड कॉन्सटेबल संजीव सिंह शहीद हो गए थे।
गिलानी ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि ''त्राल में फौज की गोलियों का शिकार हुए आबिद अहमद खान के अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए। आबिद फौज से लड़ते हुए 27 जनवरी को शहीद हो गया।'' गिलानी ने कहा, 'उनका "पवित्र रक्त" व्यर्थ में नहीं जाएगा और भारत को जमीनी हकीकत को स्वीकार करना होगा।' 84 साल के गिलानी दिल्ली में अपना इलाज करा रहे हैं। अपने ईमेल किए बयान में उन्होंने कहा, 'भारत सरकार के कठोर और जिद्दी दृष्टिकोण के कारण युवा कलम के बजाय बंदूक चुन रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'बंदूक उठाने वाले नौजवानों ने शौक से यह रास्ता नहीं चुना है। वह पढ़े-लिखे हैं और उन्हें कश्मीर की पूरी हकीकत पता है। त्राल के बहादुरों ने अपनी जान देकर पूरी कौम पर एक बड़ी जिम्मेदारी डाली है। हम लोगों का मजहबी फर्ज बनता है कि हम उनके मिशन को आगे ले जाते हुए कोई भी ऐसा काम न करें, जिससे उनकी शहादत बेकार जाए।'
बता दें कि त्राल में हुई इस मुठभेड़ में सेना के कर्नल एमएन राय और जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक हेड कॉन्सटेबल संजीव सिंह शहीद हो गए थे।
अलगाववादी नेता - सैयद अली शाह गिलानी
पार्टी- ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस
जम्मू और कश्मीर के 23 विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों का गठबंधन है यह हुर्रियत। ये एक राजनीतिक मोर्चा है और कश्मीर के भारत से अलगाव की खुलकर वकालत करता है।
पाक से नजदीकी- गिलानी जम्मू-कश्मीर में चरमपंथी संगठनों से संघर्ष कर रही भारतीय सेना की भूमिका पर अक्सर सवाल उठाने के साथ-साथ मानवाधिकार की बातें करते हैं। गिलानी भारतीय सेना की कार्रवाई को सरकारी आतंकवाद का नाम देते हैं और कश्मीर पर भारत के शासन के खिलाफ हड़ताल और प्रदर्शन करते हैं।
पार्टी- ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस
जम्मू और कश्मीर के 23 विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों का गठबंधन है यह हुर्रियत। ये एक राजनीतिक मोर्चा है और कश्मीर के भारत से अलगाव की खुलकर वकालत करता है।
पाक से नजदीकी- गिलानी जम्मू-कश्मीर में चरमपंथी संगठनों से संघर्ष कर रही भारतीय सेना की भूमिका पर अक्सर सवाल उठाने के साथ-साथ मानवाधिकार की बातें करते हैं। गिलानी भारतीय सेना की कार्रवाई को सरकारी आतंकवाद का नाम देते हैं और कश्मीर पर भारत के शासन के खिलाफ हड़ताल और प्रदर्शन करते हैं।
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- इतना ही नहीं, गिलानी 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस के समारोहों का बहिष्कार करने की सलाह कश्मीरियों को देते हैं।
विवाद - गिलानी से जुड़े विवाद इनकी ही पार्टी के अंदर ज्यादा हैं। जहां एक ओर गिलानी कश्मीर के पाकिस्तान में विलय की वकालत करते हैं। वहीं उन्हीं की पार्टी के नेता ऐसा नहीं मानते। इसी के चलते हुर्रियत टूट भी चुकी है। दूसरा गुट गिलानी की मांग से इतर, स्वतंत्र कश्मीर की वकालत करता है। दूसरी ओर, भारतीय सेना का स्पष्ट विचार है कि हुर्रियत भारत में चरमपंथी संगठनों का नेतृत्व करती है।
विवाद - गिलानी से जुड़े विवाद इनकी ही पार्टी के अंदर ज्यादा हैं। जहां एक ओर गिलानी कश्मीर के पाकिस्तान में विलय की वकालत करते हैं। वहीं उन्हीं की पार्टी के नेता ऐसा नहीं मानते। इसी के चलते हुर्रियत टूट भी चुकी है। दूसरा गुट गिलानी की मांग से इतर, स्वतंत्र कश्मीर की वकालत करता है। दूसरी ओर, भारतीय सेना का स्पष्ट विचार है कि हुर्रियत भारत में चरमपंथी संगठनों का नेतृत्व करती है।
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