मुंबई. शहर की एक टीचर श्रीदेवी पुजारी को पुलिस ने गैंगस्टर रवि पुजारी की पत्नी बताकर 30 घंटे तक हिरासत में रखा। इस दौरान पुलिस ने उनके साथ अपराधियों की तरह सलूक किया। दो दिन बाद मैंगलोर पुलिस के क्लीनचिट देने पर उन्हें छोड़ा गया।श्रीदेवी सोमवार शाम को अपने पति, 12 वर्षीय बेटी और 14 साल के बेटे के साथ दुबई की फ्लाइट लेने के लिए मुंबई इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर आई थीं। वे एयरपोर्ट पर अपने परिवार के साथ इमिग्रेशन चेकिंग के लिए आगे बढ़ीं, लेकिन इमिग्रेशन ऑफिसर्स ने उन्हें और उनके बेटे को कतार से अलग कर दिया। इसके बाद अधिकारियों ने सारे जरूरी कागजात चेक किए।
पुलिस के दावे से पैरों तले खिसकी जमीन
श्रीदेवी ने बताया, ''हमने अधिकारियों से अपने साथ किए जा रहे इस बर्ताव का कारण पूछा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद हमें एक अलग कमरे में ले जाया गया। वहां एक इमिग्रेशन ऑफिसर ने मुझे मैंगलोर के एक पुलिस अधिकारी का नंबर दिया और बताया कि मेरे और बेटे के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। यह सुनकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई और समझ में आया कि मैँ कितनी बड़ी मुसीबत में फंस गई हूं। मैँने तत्काल अपने एक दोस्त को फोन किया, जिसके अंकल एक रिटायर्ड आईजी हैं। अंकल ने मैंगलोर पुलिस से इस बारे में पूछताछ की, तो पता चला कि भगोड़े गैंगस्टर रवि पुजारी और उसकी पत्नी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है और मुझे रवि पुजारी की पत्नी बताया जा रहा है। इसके बाद मुझे अपने पूरे परिवार के साथ एक छोटे कमरे में ले जाया गया।''
हुआ अपराधियों जैसा सलूक
श्रीदेवी ने आगे बताया, ''हमारे जाते ही हथियारों से लैस कई पुलिसवाले वहां पहुंच गए। यह देख हम काफी डर गए, क्योंकि इससे पहले हमारा पुलिस से कभी भी आमना-सामना नहीं हुआ। मुझे हाईप्रोफाइल अपराधी समझ रहे अधिकारियों ने मेरे और रवि पुजारी के बारे में सवाल पूछने शुरू कर दिए। अधिकारी मेरे जवाब से संतुष्ट नजर आए, लेकिन उन्होंने विनम्रतापूर्वक कहा कि वे हमें नहीं छोड़ सकते, क्योंकि मैंगलोर पुलिस ने हमारी पहचान की है। 22 दिसंबर की पूरी रात हिरासत में गुजारने के बाद अगली सुबह मुझे कोर्ट ले जाया गया। मैँ खुद को एक क्रिमिनल की तरह महसूस कर रही थी। मुझे क्रिमिनल्स के पास पुलिस वैन में बैठाया गया। मीडियावाले मुझे घूर रहे थे। ऐसे में मुझे अपराधियों की तरह अपना चेहरा ढंकना पड़ा। कोर्टरूम के अंदर जाने से पहले मुझे अपने जूते उतारने को भी कहा गया। मैंगलोर पुलिस अगले दिन मेरी पहचान करने के लिए मुंबई आई। सारी जानकारी की पड़ताल करने के बाद मुझे अपने बेटे के साथ घर जाने की छूट दी गई।''
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