Monday, December 29, 2014

Interesting: कार गैराज से शुरू हुई थी GOOGLE, दो छात्रों ने की थी शुरुआत

Interesting: कार गैराज से शुरू हुई थी GOOGLE, दो छात्रों ने की थी शुरुआत

ब्रांड गूगल’ की चमत्कारिक सफलता की कहानी कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो छात्रों के बीच दोस्ती के साथ शुरू हुई। शुरुआत में इन दोस्तों ने गूगल को एक कार गैराज से शुरू किया था, जो आज बहुत ही अधिक लोकप्रिय बन चुकी है।
 
इंटरनेट सर्च मशीन से शुरू कर गूगल अब ई-मेल, फोटो और वीडियो, गूगल मैप और मोबाइल फोन जैसी सेवाएं देने वाली ऑलराउंडर कंपनी बन गई है। सभी सेवाएं मुफ्त हैं। कमाई होती है व्यावसायिक कंपनियों से मिलने वाले विज्ञापनों से।
 

मुफ्त में होती है कमाई

 
हम जिन सेवाओं को मुफ़्त समझते हैं, गूगल को उन्हीं के बल पर कहीं और से कमाई होती है। अन्य कंपनियां हमारे बारे में जानकारियां गूगल से खरीदती हैं या उसे अपने विज्ञापनों के लिए पैसा देती हैं। विज्ञापन पर हर क्लिक के लिए गूगल चंद सेंट से लेकर सैकड़ों डॉलर तक वसूल करता है।
 
मान्यता- एक के पीछे 100 शून्य लगा दिए जाएं तो बनती है एक अनूठी संख्या ‘गोगोल’, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे एक 9 साल के बच्चे ने गढ़ा था। इसी शब्द के अपभ्रंश से बना है शब्द ‘गूगल’, जिसके बारे में कहा जाता है कि आज अगर वह न हो, तो दुनिया खाली-खाली सी लगेगी।
आपस में नहीं पटती थी दोनों की
 
सर्जि ब्रिन और लैरी पेज 22-23 साल के थे, जब 1995 में वे पहली बार मिले। उस समय दोनों के बीच बिल्कुल नहीं पटती थी। हर बात पर बहस हो जाया करती थी। दोनों के माता-पिता बेहद पढ़े-लिखे टैक्नोक्रेट्स थे।
 
मिलकर बनाई सर्च मशीन
 
लैरी और सर्जि को दोस्त बनाया एक समस्या ने, वह थी इंटरनेट जैसे सूचनाओं के महासागर में से किसी खा़स सूचना को कैसे ढूंढ़ा जाए? दोनों ने मिल कर एक सर्च-मशीन बनाई, एक ऐसा कम्प्यूटर, जो कुछ निश्चित सिद्धांतों और नियमों के अनुसार किसी सूचना भंडार में से ठीक वह जानकारी ढूंढ़कर निकाले, जो हम चाहते हैं।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में ही किए आरंभिक परीक्षण
 
बुनियादी सिद्धांत यह था कि हाइपर लिंक द्वारा किसी वेबसाइट की ओर जितना ही अधिक इशारा किया गया हो, उतनी ही महत्वपूर्ण वह वेबसाइट होनी चाहिए। हम जिस शब्द, सूचना या प्रश्न के उत्तर की खोज कर रहे हैं, उसकी दृष्टि से इंटरनेट में उपलब्ध उपयोगी वेबसाइटों को छान कर उन्हें एक तर्कसंगत अनुक्रम में पेश करना वह गुत्थी थी, इसे लैरी और सर्जि ने मिलकर सुलझाया। दोनों ही प्रोफेशनल दोस्तों ने अपनी स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में आरंभिक परीक्षण किए। इसके लिए 11 लाख डॉलर धन जुटाया।
कार-गैरेज में बनी गूगल इनकॉपरेरेटेड
 
दोनों ने 7 सितंबर 1998 को, गूगल इनकॉपरेरेटेड के नाम से मेनलो पार्क, कैलीफोर्निया के एक कार गैरेज में अपनी कंपनी बनाई और काम शुरू कर दिया। दो ही वषों में गूगल का नाम सबकी जुबान पर था। जर्मनी में कम्प्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर डिर्क लेवान्दोस्की का मत है कि याहू जैसे अपने अन्य प्रतियोगियों की तुलना में गूगल शायद ही बेहतर है, लेकिन उसकी सार्वजनिक छवि कहीं अच्छी बन गई है।
 
सितंबर 2007 में गूगल ने पूरा किया अपना पहला दशक
 
यही उसकी चमत्कारिक सफलता का रहस्य है। इंटरनेट को दुनिया में आए दो दशक से ज्यादा समय हो गए हैं, जबकि गूगल ने सितंबर 2007 को अपना पहला दशक पूरा किया, तब भी दोनों एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं।

इस्तेमाल बढ़ने के साथ-साथ बढ़ते चले गए शेयर के दाम
 
इंटरनेट का इस्तेमाल जितना बढ़ रहा है, गूगल के शेयर भी उतने ही चढ़ रहे हैं। अगस्त 2004 में गूगल ने जब पहली बार शेयर बाजार में कदम रखा, तब उसके शेयर 85 डॉलर में बिक रहे थे। तीन वर्ष बाद, नवंबर 2007 में इसके शेयर उछलकर 747 डॉलर पर पहुंच गए थे।
 
वर्तमान में गूगल का हर शेयर करीब 533.25 डॉलर में बिक रहा है। हालांकि, गूगल के शेयर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 22 से ज्यादा तरह की बहु-उपयोगी सर्चिंग सेवाओं के साथ गूगल ने इस बीच संसार भर में फैली एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का रूप ले लिया है।
 

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