चंडीगढ़. खुशवंत सिंह उम्र का शतक पूरा नहीं कर सके। उनका 99 बरसों का सफर सौ से ज्यादा किताबों में समाया हुआ है। इस दौरान उनका दिल्ली और विवादों से नाता कभी भी नहीं टूटा। बचपन में भगत सिंह के ऑटोग्राफ लेने जेल पहुंच गए थे जबकि उन्हीं के पिता सरदार शोभा सिंह की गवाही पर भगत सिंह व बटुकेश्वर दत्त को जेल हुई थी। वे 1911 में दिल्ली के देश की राजधानी बनने के चार साल बाद 1915 में पैदा हुए थे। 
पद्म भूषण' और 'पद्म विभूषण' से सम्मानित
खुशवंत सिंह भारत के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक, उपन्यासकार और इतिहासकार थे। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में विदेश सेवा के सम्माननीय पद पर भी खुशवंत सिंह जी ने कार्य किया है। खुशवंत सिंह को 'पद्म भूषण' और 'पद्म विभूषण' से भी नवाजा गया। खुशवंत सिंह को 1974 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। 1984 में स्वर्ण मंदिर में सेना के प्रवेश के विरोध में उन्होंने यह सम्मान लौटा दिया था। 2007 में उन्हें पद्म विभूषण से विभूषित किया गया। भारत के जाने-माने लेखक खुशवंत सिंह का 99 साल की उम्र में 20 मार्च 2014 को निधन हो गया था।
करीबी होने बाद भी किया था इंदिरा गांधी का विरोध
खुशवंत सिंह इंदिरा गांधी के बेहद करीब थे और उन्होंने इमरजेंसी के दौरान उनका समर्थन भी किया था, लेकिन बाद में जब इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लूस्टार को मंजूरी दी तो वे उनके खिलाफ हो गए और पद्म सम्मान वापस कर दिया। यहां यह बात गौर करने लायक है कि उन्होंने चरमपंथी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनकी नीतियों का जमकर विरोध किया था। बेबाक, जीवंत और विवादित यादें
- अपना स्मृति लेख खुद ही लिख कर गए। लिखा, यहां जो लेटा है उसने न इंसान को छोड़ा न भगवान को। इसके लिए आंसू बरबाद मत करो।खुशवंत सिंह इंदिरा गांधी के बेहद करीब थे और उन्होंने इमरजेंसी के दौरान उनका समर्थन भी किया था, लेकिन बाद में जब इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लूस्टार को मंजूरी दी तो वे उनके खिलाफ हो गए और पद्म सम्मान वापस कर दिया। यहां यह बात गौर करने लायक है कि उन्होंने चरमपंथी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनकी नीतियों का जमकर विरोध किया था। बेबाक, जीवंत और विवादित यादें
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